1950-1959 के दौरान की महत्‍वपूर्ण घटनाएं :

· डॉ. अर्नस्‍ट जिप्किस, प्रसिद्व सड़क अभियन्‍ता, स्‍वीटजरलैण्‍ड, पूर्व प्रभारी सड़क अनुसंधान विभाग, फैडरल प्रौद्योगिकी संस्‍थान, जुरीख, मई 1950 में निदेशक नियुक्‍त किए गए ।

· संस्‍थान की नींव 6 सितम्‍बर 1950 में एन गोपालास्‍वामी अययगर, परिवहन मंत्री, भारत सरकार के द्वारा रखी गई । संस्‍थान को 11 कि.मी. दूर दिल्‍ली-मथूरा रोड़ पर 33 एकड़ भूमि आंवटित की गई थी । इस दिन डॉ. एस एस भटनागर, निदेशक, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआरआर) ने के.स.अ.सं. का अधिदेश/ आदेशपत्र रेखांकित किया । 1951 में के...सं. ने प्रस्‍तावित जगह पर एक अस्‍थाई भवन में 15 तकनीकी तथा अन्‍य 22 स्‍टाफ सदस्‍यों सहित कार्य करना आरम्‍भ किया । मृदा, डामर, कंक्रीट तथा निर्माण सामग्री अनुसंधान के क्षेत्र थे ।

· भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जुलाई 1952 में संस्‍थान के मुख्‍य भवन का उदघाटन किया । मौलाना अबुल कलाम आजाद, शिक्षा एवं संस्‍कृति मंत्री, उपाध्‍यक्ष सी एस आइ आर ने अपना अभिभाषण दिया  ।

· प्रो. एस आर मेहरा, के स अ सं प्रथम भारतीय निदेशक बने । प्रो. एस आर मेहरा पंजाब अभियांत्रि‍की महाविद्यालय के प्रिंसिपल तथा पी डब्‍लू डी अनुंसधान प्रयोगशाला, करनाल, पंजाब के निदेशक थे ।

· नवीन पुस्‍तकालय भवन तथा सेमिनार हाल निर्मित किया गया । अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला उपस्‍कर मंगवाए गए । पास के 72 बीघा प्‍लाट में परीक्षण पथ बनाए गए ।

· कंक्रीट तथा मसाले के प्रतिरोधक घर्षण का मूल्‍यांकन करने के लिए परीक्षण विधि तथा परीक्षण उपस्‍कर विकसित किए गए । ये उपलब्धियां बाद में भारत मानक बनें ।

· 1958 में भारतीय सड़क कांग्रेस (आइ आर सी) में अध:स्‍तर संहनन प्रौद्योगिकी के अनुसंधान तथा सुनम्‍य कुट्टिम के अभिकल्‍प की संस्‍तुति की गई ।

· सड़क निर्माण में निम्‍न कोटि मृदु (साफ्ट) सामग्री का प्रयोग कर प्रौद्योगिकी विकसित की गई । भारत में गहन खोज के पश्‍चात विभिन्‍न प्रकार की अध:स्‍तर सामग्री की उपलब्‍धता को दर्शाते हुए कन्‍टूर (समोच्‍च रेखा) मानचित्र तैयार किया गया ।

· राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अध-स्‍तर आर्द्रता (नमी) परि‍स्थिति सर्वेक्षण संचालित किया गया तथा भारत के विभिन्‍न भागों में अध:स्‍तर संतृप्ति स्‍तर को दर्शाते हुए मानचित्र को विकसित किया गया ।

· भारत हैवी इलैक्ट्रिकल्‍स (बी एच ई एल) के लिए 180 टन परिवहन वाहनों के लिए कुट्टिम मोटाई तथा निर्माण विधि तैयार की गई ।

· उर्ध्‍वाधर बालू अपवाह प्रणाली अभिकल्‍प तथा निर्माण विधि विकसित की गई जो कि त्‍वरण तटबंध सैटलमैंट में सहायक बनी ।

· कच्‍छ भूमि तथा दलदल के माध्‍यम से पूर्वी द्रुतगामी महामार्ग, मुम्‍बई के निर्माण के दौरान तकनीकी सर्वेक्षण तथा गुणवता नियन्‍त्रण प्रदान किया गया ।

· ग्रामीण भारत में 1950 में बैलगाड़ी (पशुचालित मोटर रहित परिवहन) माल ढोने का प्रमुख वाहन था । पहिए के लचीले अभिकल्‍प, योक सम्‍पर्क क्षेत्र तथा धुरी भार वितरण के माध्‍यम से पशु कंधों पर दाब को न्‍यूनतम किया गया एवं बैलगाड़ी की गति को आसान बनाया गया ।

 

 

 

इतिहास

 

1950-1959    1960-1969    1970-1979    1980-1989    1990-1999    2000-2005

        संस्‍थान का इतिहास गत 55 वर्षो के दौरान निरन्‍तर संघर्ष के बाद सड़क तथा परिवहन अभियांत्रि‍की के क्षेत्र में विद्यमान प्रौद्योगिकी में सुधार एंव नवीन गतिविधियों के विकास के उपरांत लिखा  गया । विगत सभी कार्यों का लेखा जोखा उचित ढंग से रिकार्ड़ नहीं किया गया था और छोटे-छोटे कार्यो को नजर अन्‍दाज किया गया । कुछेक महत्‍वपूर्ण घटनाओं को यहां काल क्रमानुसार प्रस्‍तुत किया गया है, जो संस्‍थान की प्रगति तथा राष्‍ट्र के प्रति समर्पित सेवा को दर्शाती हैं ।

प्रो. एस. आर. मेहरा

उपक्रम तथा आयोजना