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· भारी वर्षा के कारण ऋषिकेष जोशीमठ सड़क पर भारी क्षति के पश्चात् भू-स्खलन पर परामर्श कार्य किया गया । · शिमला में भू-स्खलन के कारण सड़कों तथा भवनों को क्षति के पश्चात् अनेक सुधारात्मक उपाय संस्थान ने संस्तुत किए । · दिल्ली तथा बंगलौर के लिए विस्तृत शहरी सड़क सुधार तथा प्रबन्ध आयोजना प्रदान करने के लिए परियोजनाएं लेने के पश्चात् यातायात तथा परिवहन प्रभाग प्रकाश में आया । यातायात सरकुलेशन, चौराहा अभिकल्प, पार्किंग, पैदल यात्री सुविधा पर अनेक अन्य शहरों तथा कस्बों में अध्ययन किए गए । · क्षतिग्रस्त कंक्रीट सड़कों तथा हवाई पट्टियों की शीघ्र मरम्मत के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की गई । इस विधि के द्वारा सिथेटिक रेजिन का प्रयोग करते हुए 8-12 घण्टों में मरम्मत पूरी की जा सकती है । इस तकनीक पर आइ आर सी ने एक निर्देश पुस्तिका प्रकाशित की । · बंधकों की उपयुक्त श्रेणी निर्धारित करने के लिए विभिन्न जलवायु स्थितियां परीक्षण पथ प्रयोग प्रारम्भ किए गए । · देश के शुष्क, अर्ध शुष्क, नम, अर्ध नम तथा पूर्व नम क्षेत्रों में डामर की विभिन्न पाँच श्रेणियों जैसे 30/40, 40/50 तथा 80/100 का अन्त:स्त्रवण अध्ययन किया गया । · मास्टिक एस्फाल्ट आपृष्ठन (घुटाई) के निष्पादन का अनुसंधान दर्शाता है कि यह कुट्टिम संरचना को अन्य परम्परागत विधियों की तुलना में बेहतर सुरक्षा तथा वहनीयता दे सकता है । सार्वजनिक निर्माण विभाग के पूरे देश में सड़क चौराहों, फलाईओवर, बस स्टाप तथा सेतुओं पर रपटन रोधक सतह के रूप में रोड़ी रोपित (ग्राफटिड) मास्टिक एस्फाल्ट बिछाना शुरू कर दिया । · केन्द्रीय मैकेनिकल अनुसंधान संस्थान के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर का प्रयोग करने की प्रौद्योगिकी का विकास किया गया । विभिन्न वाहनों/गतिमय उपस्करों जैसे डिस्क हैरो, रोटावेटर, रोटिल्लर, पानी टैंकर विकसित किए गए जो ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत उपयोगी तथा मितव्ययी पाए गए । · संस्थान ने कंक्रीट सड़क निर्माण के लिए कुछ उपयोगी यंत्र (डिवाइसिस) विकसित किए । इनमें स्वचालित जोड़ (सीलिंग) बंद करने का यंत्र, सतह पट्टी वाइब्रेटर, जोड़ निर्माण यंत्र हैं । · मरू तथा रेतीले क्षेत्रों के लिए पूर्व निर्मित कंक्रीट ब्लाक कुट्टिम प्रौद्योगिकी का विकास किया गया । सुनम्य तथा कंक्रीट कुटिटम का निर्माण जल तथा परिवहन के अभाव के कारण मरू क्षेत्रों में अत्यधिक कठिन होता है तथा उपयुक्त अभिकल्पित पूर्व निर्मित ब्लाक बिछाना बेहतर विकल्प है । खण्डों का अभिकल्प षट्कोणीय, सपाट सतह परन्तु तल खोखला रिब सहित है, जो कि अनवरत सतह बनाने के लिए स्टरडी गुच्छी (डोवेल्स) के साथ परस्पर जोड़े जाते हैं । · संस्थान में सड़क असमतलता नापने के यंत्र विकसित किए गए । · वै औ अ प की योजना ‘‘जिलों का रूपांतरण’’ के अन्तर्गत संस्थान ने आंध्रप्रदेश में करीम नगर जिले को चुना । इस चयन प्रक्रिया में सीविल अभियांत्रिकी क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले उतरदायित्व जैसे सड़क सुधार, आवास, जल आपूर्ति, स्वच्छता इत्यादि सम्मिलित थे । · विक्षेप तथा विकृति मापने के लिए संस्थान ने विभिन्न तकनीकों का विकास किया तथा सेतुओं का निष्पादन मूल्यांकन के लिए परीक्षण भार प्रयोग में लाए गए । इस क्षेत्र में आन्तरिक परीक्षण सुविधाएं भी विकसित की गई । · जुलाई 1977 में प्रो. सी जी स्वामिनाथन ने निदेशक का पदभार सम्भाला । · 1978 में यातायात एवं परिवहन प्रभाग द्वारा बम्बई महानगर क्षेत्र के लिए विस्तृत यातायात एवं परिवहन अध्ययन किया गया । · 1979 में संस्थान द्वारा विश्व बैंक द्वारा प्रायोजित सड़क उपभोक्ता लागत अध्ययन प्रारम्भ किया गया । अध्ययन का उद्देश्य विभिन्न परिस्थितियों के अन्तर्गत वाहन निष्पादन के गणितीय माडल का विकास करने के लिए विस्तृत डाटा एकत्रित करना था, जो कि विभिन्न वर्गों के वाहनों की ईधन खपत का अनुमान लगाएगा । डाटा का उपयोग विश्व बैंक के महामार्ग अभिकल्प तथा रखरखाव (एच डी एम -3) के माडल का विकास करने में किया गया । |
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ऐजिन प्रोद्योगिकी का प्रयोग करते हुए डम्पर प्लेटफार्म की कंक्रीट सतह |
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1970-1979 के दौरान की मुख्य घटनाएं :- |

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सेतु डैक के लिए मास्टिक एस्फाल्ट सतह |

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फर्शी कंक्रीट के सक्षम संहनन के लिए उन्नत सतह स्क्रीड वाइब्रेटर |