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· एक चलती-फिरती प्रयोगशाला स्थापित की गई जो कार्यस्थल परीक्षण के लिए आवश्यक बन गई । यह नवीनतम परीक्षण सुविधाओं से लैस थी तथा बहुत सी परियोजनाओं में कार्यस्थल खोज संचालित करने में काफी सहायक सिद्व हुई । · परिवर्ती/(घटते-बढ़ते) भार के अन्तर्गत संस्थान में सुनम्य तथा दृढ़ कुटि्टम उपरिशायी सामर्थ्य भार वहन परीक्षण आधार सुविधा उत्पन्न की गई । 40 टन के अधिकतम भार के कारण कुटि्टम प्रतिक्रिया प्राप्त की गई । · ईंट भरत/भराव कंक्रीट कुटि्टम अभिकल्प विकसित किया गया । कुटि्टम सामथर्य पर बिना किसी कम्प्रोमाइस के अभिकल्प ज्यादा मितव्ययी है । · दृढ़ कुटि्टम खण्डों के अभिकल्प में कंक्रीट स्लैब की उपरी तथा निचली सतह के बीच तापमान अन्तर की एक महत्वपूर्ण भूमिका है । अधिक अन्तर कुटिटम खण्डों में तापमान प्रेरित प्रतिबल बनाता है । देश में विभिन्न स्थानों पर विभिन्न मोटाई पर अन्तरात्मक तापमान अभिग्रहण (कैपचर) करने के लिए अध्ययन संचालित किया गया । अभिकल्प मोटाई पर उपलब्धियां तथा संस्तुतियों को भारतीय सड़क कांग्रेस (आइ आर सी) द्वारा दिशा निर्देश के रूप में स्वीकार किया गया । · बर्न्टक्ले पोजोलाना पोर्टलैण्ड सीमेंट स्थानापन्न सामग्री के रूप में विकसित की गई । यह देखा गया कि सीमेंट कंक्रीट कुटि्टम निर्माण में सीमेंट का 20 प्रतिशत तक पोजोलाना द्वारा बदला जा सकता है । यह परियोजना संस्थान द्वारा तब ली गई जब 1960 में देश सीमेंट की भारी कमी से जूझ रहा था । · लगातार प्रबलित कंक्रीट कुटि्टम तथा निर्माण प्रौद्योगिकी का विकास किया गया तथा संस्थान द्वारा देश में परिचित कराई गई । इस प्रकार की कुटि्टम अधिक मोटाई की आवश्कयता को कम करती है तथा निर्माण जोड़ों को हटाती है एवं कुटि्टम पर भारी यातायात प्रवाह के लिए उपयुक्त है । इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए एयर फील्ड कुटिटम का निर्माण भी किया गया । उपलब्धियों तथा संस्तुतियों को बाद में आइ आर सी दिशा निर्देश के रूप में अनुमोदित किया गया । · संस्थान ने बद्व कंक्रीट निर्माण विकसित की तथा भारत में पहली बार एयर फील्ड निर्माण के लिए इसका प्रयोग किया गया । कुटि्टम उपयोगिता रेटिंग इन्डैक्स विकसित किया गया जो सड़क उपयोगकर्ता के आराम सुविधा तथा विभिन्न विकृति प्राचलों को जोड़ता है । इस परियोजना के लिए डाटा एकत्रित करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण संचालित किया गया । · सेतु अवसंरचना तथा नींव पर बढ़ती हुई परामर्श मांग को देखते हुए 1966 में अलग से सेतु प्रभाग की स्थापना की गई । इसी वर्ष एक अन्य भारी परीक्षण आधार 12एम का निर्माण किया गया । · विशाखापटटनम, मद्रास, टयूटीकोरिन, मंगलौर, गोवा, कांडला पोर्ट क्षेत्र में मृदु/नरम समुद्री मृदा के स्थिरीकरण, नींव उपचार, यांत्रीकरण तथा सुधार, कृषि योग्य भूमि पर सड़क तथा भवन निर्माण पर परियोजना कार्य किया गया । · 8 अगस्त 1968 को डा. बी.एच. सुब्बाराजू ने अगले निदेशक का पदभार सम्भाला । |
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के.स.अ.स. द्वारा अभिकल्पित तथा विकसित उन्नत बैलगाड़ी का प्रदर्शन |
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1960-1969 तक की प्रमुख घटनाएं :- |

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रा.महा.-24 पर परीक्षण पथ निर्माणाधीन |
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रा.महा.-2 पर कंक्रीट कुट्टिम निर्माणाधीन |