सीएसआईआर-सीआरआरआई बायो-बिटुमेन टेक्नोलॉजी
सीएसआईआर-सीआरआरआई बायो-बिटुमेन तकनीक
बिटुमेन आयात और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का एक संधारणीय समाधान यह पृष्ठ सीएसआईआर-सीआरआरआई की बायो-बिटुमेन तकनीक का एक व्यापक तकनीकी अवलोकन प्रस्तुत करता है जिसे संधारणीय सड़क निर्माण के लिए चावल के भूसे (पराली) के पायरोलिसिस का उपयोग करके विकसित किया गया है।
राष्ट्रीय संदर्भ और आवश्यकता मूल्यांकन
भारत का सड़क निर्माण क्षेत्र पेट्रोलियम-आधारित पेविंग बिटुमेन पर बहुत अधिक निर्भर है। राष्ट्रीय बिटुमेन की लगभग 49% आवश्यकता आयात से पूरी होती है, जिसके परिणामस्वरूप वार्षिक लगभग ₹25,000 करोड़ का विदेशी मुद्रा खर्च होता है। यह निर्भरता इस क्षेत्र को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति-श्रृंखला जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है। साथ ही, भारत सालाना 600 मिलियन टन से अधिक कृषि अवशेष उत्पन्न करता है। इस बायोमास का एक बड़ा हिस्सा, विशेष रूप से चावल का भूसा (पराली), आर्थिक रूप से व्यवहार्य उपयोग के तरीकों की कमी के कारण खुले खेतों में जलाया जाता है जिससे गंभीर वायु प्रदूषण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, मृदा के पोषक तत्वों का नुकसान और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। इन चुनौतियों का अलग-अलग समाधान करने से सीमित सफलता मिली है। इसीलिए, एक ऐसा एकीकृत समाधान जो एक साथ बिटुमेन आयात पर निर्भरता को कम करे और पराली जलाने को भी रोके, स्थायी, प्रतिस्कन्दी (resilient) और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार सड़क अवसंरचना ढांचे के विकास के लिए आवश्यक है।
मुख्य चुनौतियाँ
• आयातित पेट्रोलियम बिटुमेन पर उच्च निर्भरता
• सुनम्य कुट्टिम निर्माण की बढ़ती लागत
• खुले खेतों में पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण
• कृषि बायोमास से संभावित मूल्य का नुकसान
सीएसआईआर समाधान: बायो-बिटुमेन
सीएसआईआर-सीआरआरआई ने सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) के सहयोग से चावल के भूसे के पायरोलिसिस का उपयोग करके एक अभिनव बायो-बिटुमेन टेक्नोलॉजी विकसित की है। परिणामी बायो-ऑयल को रासायनिक इकाई संचालन के माध्यम से अपग्रेड किया जाता है ताकि एक बायो-बाइंडर बनाया जा सके जो सुनम्य कुट्टिम अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हो, या तो आंशिक प्रतिस्थापन के रूप में या पारंपरिक वीजी-ग्रेड बिटुमेन के संशोधक के रूप में।
चावल का भूसा → पायरोलिसिस → बायो-ऑयल → बायो-बाइंडर → सुनम्य सड़कें
तकनीक प्रक्रिया अवलोकन
चावल के भूसे का पायरोलिसिस चावल के भूसे के नियंत्रित तापीय अपघटन से बायो-ऑयल, बायो-चार (bio-char) और गैसीय उत्पाद बनते हैं।
बायो-बाइंडर उत्पादन
चावल के भूसे का पेलेट्स में सघनीकरण किया जाता है और पायरोलिसिस के माध्यम से संसाधित करके बायो-ऑयल प्राप्त किया जाता है, जिसे आगे सुनम्य कुट्टिम अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बायो-बाइंडर में अपग्रेड किया जाता है।
सड़कों में अनुप्रयोग
बायो-बाइंडर का उपयोग पारंपरिक उपकरणों और तरीकों के साथ हॉट मिक्स डामर में किया जाता है।
एसएआरए (SARA) विश्लेषण (रासायनिक लक्षण वर्णन)
एस्फाल्टेन
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प्रदर्शन मूल्यांकन (प्रयोगशाला)
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कार्यस्थल प्रदर्शन (फील्ड डेमोंस्ट्रेशन)
26 अक्टूबर 2024 को एनएच-6 (NH-6) (जोरबाट-शिलांग एक्सप्रेसवे) पर बायो-बिटुमेन के एक परीक्षण खंड को सफलतापूर्वक बनाया गया, जिसने यातायात के तहत संतोषजनक कार्यस्थल प्रदर्शन दिखाया।
प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व
• हर वर्ष ₹4,000–4,500 करोड़ की संभावित बचत
• ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में ~70% की कमी
• खेती के कचरे और किसानों की आय में मूल्य वृद्धि (वैल्यू एडिशन)
• अपशिष्ट से संपदा मिशन और संधारणीय लक्ष्यों के साथ तालमेल







































