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डॉ रंजना अग्रवाल, निदेशक, सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान

डॉ. रंजना अग्रवाल, निदेशक सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास अध्ययन संस्थान (सीएसआईआर-निस्टैड्स) को सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) के निदेशक के रूप अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

डॉ रंजना अग्रवाल, निदेशक, सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान

इससे पहले डॉ. रंजना अग्रवाल ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में प्रोफेसर, रसायन तथा निदेशक, महिला अध्ययन अनुसंधान केंद्र के रूप में सेवाएं दी हैं। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र से बी.एससी., एम.एससी तथा पीएच.डी. की उपाधियां प्राप्त की हैं तथा तत्पश्चात कैब्रिज विश्वविद्यालय, यूके से इरिथ्रोमाइसिन बायोसिन्थेसिस पर दो वर्षीय पोस्टडॉक्टरल शोध पूरी करने के पश्चात् उन्होंने वर्ष 1995 में अपनी मातृ-संस्था में प्रवव्ता के रूप में कार्यग्रहण किया। उसके पश्चात उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित यूरोपियन प्रयोगशालाओं जैसे कैब्रिज विश्वविद्यालय में कॉमनवैल्थ फैलो, ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन, आयरलैंड तथा यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रिस्टे, इटली में कार्य किया है । उन्होंने यूएसए, स्पेन तथा आयरलैंड के वैज्ञानिकों के साथ सक्रिय रूप से कार्य किया है।

उनके शोध अभिरुचि वाले क्षेत्रों में डिजाइन एंड सिंथैसिस ऑफ एजहैटरोसाइकिल्स, इन्वॉलविंग ग्रीन रीजेंट्स ऑफ थैरेपेयूटिक इन्टरेस्ट ऐज एन्टीकैंसर, एन्टी इंफ्लेमेटरी, एंटीमाइक्रोबियल एंड फोटोडायनैमिक एजेन्ट्स, कंप्यूटेशनल स्टडीज एंड 2डी एनएमआर स्पैक्ट्रोस्कोपी आदि शामिल हैं । हाल ही में उन्हें डीएनए टार्गेटिंग द्वारा कैंसर का उपचार करने के लिए नये लीड्स विकसित करने हेतु हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा शोध अनुदान स्वीकृत किया गया है ।

उनके शोध योगदानों को अभिस्वीकृति देते हुए इंडियन कैमिकल सोसायटी द्वारा उन्हें विशेष रूप से डॉ. बासुदेव बनर्जी मैमोरियल अवार्ड (2014) तथा इंडियन साइंस कांग्रेस द्वारा प्रो. एस. एस. कटियार अवार्ड (2015) प्रदान किया गया है । उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा अत्यंत कुशल शिक्षाविद के रूप में नेशनल मॉनीटरिंग कमेटी फॉर माइनरटीज एजूकेशन के सदस्य के रूप में नामित किया गया है। डॉ. रंजना अग्रवाल महिला अध्ययन अनुसंधान केंद्र के निदेशक के रूप में कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम, प्रोमोशन ऑफ जेंडर सेंसिटाइजेशन तथा विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास में सक्रिय रूप से कार्यरत रही हैं।